गणतंत्र दिवस पर खंडवा में झंडा फहराने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज
मध्य प्रदेश के खंडवा में गणतंत्र दिवस के अवसर पर कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। कांग्रेस ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा सरकार पर ‘बेशर्मी’ और ‘अदालत की अवमानना’ का आरोप लगाया है।
19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार को दो हफ्ते के भीतर यह फैसला लेना चाहिए कि क्या शाह के खिलाफ कर्नल कुरैशी के प्रति विवादास्पद टिप्पणियों के मामले में मुकदमा चलाया जाए। इससे पहले, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शाह को उनके अपमानजनक भाषण और अशोभनीय टिप्पणी के लिए फटकार लगाई थी, साथ ही पुलिस को उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश भी दिया था।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और कानूनी जटिलताएं
सत्ताधारी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री यादव की ‘वर्किंग स्टाइल’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद शाह को तुरंत उनके मंत्री पद से हटा देना चाहिए था। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने शाह को गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने की अनुमति देकर संविधान का उल्लंघन किया है।
विपक्षी नेता उमंग सिंघार ने भी शाह की तिरंगा फहराने पर आपत्ति जताई और कहा कि भाजपा अब एक बेशर्म पार्टी बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को कई मामलों में स्वतः संज्ञान लेना पड़ रहा है। वहीं, भाजपा के प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने शाह का समर्थन करते हुए कहा कि मामला पहले ही कोर्ट के संज्ञान में है और सभी कार्यवाही कोर्ट के निर्देशानुसार हो रही है।
कानूनी विवाद और विवादित टिप्पणियों का इतिहास
मंत्री विजय शाह पर आरोप है कि उन्होंने 12 मई 2025 को इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और जिले के मानपुर पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। बाद में, शाह ने अपने बयान के लिए खेद व्यक्त किया और कहा कि वह कर्नल कुरैशी का सम्मान अपनी बहन से भी अधिक करते हैं।
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने शाह को उनकी टिप्पणियों पर सार्वजनिक माफी न देने के लिए फटकार लगाई और कहा कि वह अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके आचरण से उनके इरादों और नेकनीयती पर संदेह पैदा होता है।









