गणतंत्र दिवस पर नागरिकों को संविधान का पालन करने का आह्वान
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे संविधान में निहित अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें। उन्होंने कहा कि भारत को एक मजबूत और अग्रणी गणराज्य बनाने के लिए समाज में उच्च आदर्श और नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है। इस अवसर पर उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदानों को याद करते हुए कहा कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह गणराज्य की रक्षा करे और उसे सुदृढ़ बनाये। मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मजबूत गणतंत्र केवल सरकार से नहीं, बल्कि नागरिकों के व्यवहार और संस्कारों से बनता है।
संविधान और राष्ट्रीय ध्वज का महत्व
उन्होंने तिरंगे के प्रतीकात्मक महत्व को समझाते हुए कहा कि केसरिया रंग त्याग और साहस का प्रतीक है, जबकि सफेद रंग शांति और पवित्रता का परिचायक है। हरा रंग प्रगति और समृद्धि का सूचक है। तिरंगे के मध्य में स्थित अशोक चक्र यह दर्शाता है कि देश की हर प्रगति और विकास धर्म के मार्गदर्शन में ही संभव है। मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान और उसकी गरिमा हमारे देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है, जिसे हमें सदैव संजोना चाहिए।
देश की आजादी और राष्ट्रीय मूल्यों का संरक्षण
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों ने जो बलिदान दिए, वे हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। आज का कर्तव्य है कि हम इन मूल्यों को बनाए रखें और देश की एकता को मजबूत करें। उन्होंने यह भी कहा कि देश की प्रगति और विकास के लिए समाज में नैतिकता और आदर्शों का होना जरूरी है। मोहन भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करें और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें, ताकि भारत विश्व में एक आदर्श राष्ट्र के रूप में उभरे।









