दरभंगा के गर्ल्स हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था का आकलन
पटना में हुई छात्रा की दुखद मौत के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रही छात्राओं की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है। इस संदर्भ में ‘आजतक’ की टीम ने दरभंगा के एक प्रमुख गर्ल्स हॉस्टल S.K. Tower का दौरा किया, जहां 60 से अधिक छात्राएं अपने घर से दूर रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। टीम ने हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन का बारीकी से निरीक्षण किया।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन का दावा
हॉस्टल की महिला प्रबंधक ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अभी तक कोई लिखित सुरक्षा दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। इसके बावजूद, हॉस्टल प्रबंधन ने अपने स्तर पर कड़ी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रखी है। प्रबंधक का कहना है कि यहां रहने वाली छात्राएं न केवल खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, बल्कि उन्हें घर जैसा आरामदायक माहौल भी प्रदान किया जाता है।
सुरक्षा के उपाय और नियम
प्रबंधन का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी छात्रा ने सुरक्षा को लेकर कोई शिकायत नहीं की है। पूरे हॉस्टल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनकी लाइव निगरानी दो स्थानों पर होती है-एक हॉस्टल के अंदर और दूसरी संचालक के मोबाइल फोन पर। छात्राओं के आने-जाने और बाहर की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जाती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या परेशानी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाती है।
हॉस्टल में पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। परिवार के सदस्य केवल रिसेप्शन पर ही मिल सकते हैं, और यह भी पूर्व सूचना के बाद। यदि किसी विशेष परिस्थिति में पुरुष मजदूर या मिस्त्री को बुलाना पड़ता है, तो महिला वार्डन उसकी निगरानी करती हैं। हॉस्टल का संचालन पूरी तरह से महिला स्टाफ के हाथ में है, जो 24 घंटे मौजूद रहती है।
हालांकि, हॉस्टल संचालक का कहना है कि निजी गर्ल्स हॉस्टल के लिए सरकार या जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट सुरक्षा दिशा-निर्देश नहीं हैं। इससे यह सवाल उठता है कि सरकार इस दिशा में कोई मजबूत नियम क्यों नहीं बना रही है, क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है। पटना जैसी घटनाओं के बाद यह चिंता और भी गहरी हो जाती है कि छात्राओं की सुरक्षा के लिए समान और सख्त नियम क्यों नहीं लागू किए जाते।
छात्राओं का कहना है कि पटना की घटना के बाद उनके मन में डर जरूर है, लेकिन वे हॉस्टल में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। यहां का स्टाफ उनका ख्याल परिवार की तरह रखता है, जिससे उन्हें घर से दूर होने का एहसास कम होता है और वे निश्चिंत होकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाती हैं।









