दिल्ली से देहरादून के बीच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का अंतिम चरण
दिल्ली और देहरादून के बीच बन रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में है। यह लगभग 210 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पूरी तरह से तैयार हो चुका है, बस कुछ छोटी फिनिशिंग कार्य शेष हैं। जैसे ही यह कार्य पूरा होगा, इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस नई सड़क मार्ग के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय करीब 2.5 घंटे रह जाएगा, जबकि वर्तमान में यह सफर 6 से 7 घंटे में पूरा होता है।
आधुनिक सुविधाओं और तेज यात्रा का अनुभव
यह कॉरिडोर लगभग 11,970 करोड़ रुपये की लागत से बना है और इसे दिल्ली-देहरादून मार्ग के रूप में जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और आरामदायक बनाना है। इस नए मार्ग से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच संपर्क भी मजबूत होगा। दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर यह हाईवे गीता कॉलोनी के पास से एलिवेटेड सेक्शन में प्रवेश करता है, जो छह लेनों वाला अत्याधुनिक मार्ग है। एनएचएआई (National Highways Authority of India) के इंजीनियर बलराम के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर तेजी से पूरा किया गया है।
सुविधाएं, सुरक्षा और प्राकृतिक संरक्षण
लोनी के पास इस कॉरिडोर पर पहला टोल बूथ बनाया गया है, जहां से लगभग 17 किलोमीटर तक एंबुलेंस और हाईवे पेट्रोल की सुविधा उपलब्ध रहेगी। किसी भी आपात स्थिति में 1033 नंबर पर कॉल कर तुरंत मदद प्राप्त की जा सकती है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से निकलकर बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड में प्रवेश करता है। कई हिस्सों में ट्रायल रन सफलतापूर्वक किए गए हैं, और बचा हुआ काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। बागपत के पास इस मार्ग को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने का भी प्रावधान है।
सड़क पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। हर 30 किलोमीटर पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें खाने-पीने की व्यवस्था और इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं, जैसे मियावाकी तकनीक से पेड़ लगाना और कोहरे तथा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए विशेष इंतजाम।
उत्तराखंड में प्रवेश करते ही यह हाईवे फिर से एलिवेटेड हो जाता है, जहां पहाड़, जंगल और वाइल्डलाइफ का सुंदर दृश्य देखने को मिलता है। शिवालिक रेंज और राजाजी नेशनल पार्क के बीच से गुजरते हुए इस कॉरिडोर में जानवरों की आवाजाही में कोई बाधा न आए, इसके लिए विशेष सावधानियां बरती गई हैं। साउंड बैरियर और प्लास्टिक शीट्स का इस्तेमाल किया गया है ताकि जंगल में रोशनी और आवाज कम पहुंचे।
सुरंग, कला और देहरादून तक आसान पहुंच के साथ यह मार्ग पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत का भी ध्यान रखता है। रात के समय जानवरों को परेशान न करने के लिए विशेष लाइटें लगाई गई हैं, और हाथियों की आवाजाही के लिए एलिवेटेड रास्ते बनाए गए हैं। लगभग 300 मीटर लंबी सुरंग को उत्तराखंड की सांस्कृतिक छवियों और कला कृतियों से सजाया गया है। इस सुरंग के पार होते ही देहरादून शहर का रास्ता शुरू हो जाता है, और यात्रा का समय ढाई घंटे से भी कम हो जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि अब केवल कुछ छोटी फिनिशिंग का काम बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा न केवल तेज, बल्कि अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक भी बन जाएगी।










