पटना में मकर संक्रांति पर राजनीतिक संकेतों का संगम
पटना में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने बिहार की राजनीतिक दिशा में नई उम्मीदें जगा दी हैं। इस कार्यक्रम में बिहार के प्रमुख नेता और परिवार के सदस्य एक साथ नजर आए, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। खास बात यह रही कि इस आयोजन में आरजेडी के वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव और बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एक साथ बैठकर अपनी मौजूदगी का एहसास कराते दिखे। तेज प्रताप यादव ने इस कार्यक्रम की व्यवस्था स्वयं संभाली और मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
लालू प्रसाद यादव का सम्मान और परिवार की फिर से मेलजोल की उम्मीदें
इस दही-चूड़ा भोज के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। दोनों नेता एक साथ बैठकर पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते नजर आए। तस्वीरों में स्पष्ट देखा गया कि तेज प्रताप हर छोटी-बड़ी व्यवस्था पर नजर रख रहे थे, ताकि कोई कमी न रह जाए। लालू यादव की सेहत का भी विशेष ध्यान रखा गया, धूप तेज होने पर उनके चेहरे पर तौलिया रखा गया। यह सब इस बात का संकेत है कि लालू यादव इन दिनों अस्वस्थ होने के बावजूद भी परिवार के साथ जुड़े रहने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक संकेत और परिवार में नई उम्मीदें
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ समय पहले लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से तेज प्रताप यादव को परिवार और पार्टी से बाहर करने का संकेत दिया था। अब उनकी उपस्थिति से यह प्रतीत होता है कि परिवार के अंदर जमी बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही है। इस कार्यक्रम में तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी चर्चा का विषय रही। जब तेज प्रताप से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि तेजस्वी देर से सोकर उठते हैं, इसलिए शायद देर से आएंगे। इस टिप्पणी को राजनीतिक गलियारों में भाई-भाई के रिश्तों की तल्खी के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, तेज प्रताप के मामा साधु यादव ने भी इस आयोजन में भाग लिया और तेज प्रताप को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि लालू परिवार फिर से एकजुट हो और तेज प्रताप घर लौट आएं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने कहा कि 14 जनवरी के बाद नए समीकरण बनेंगे और बिहार की राजनीति में नई दिशा आएगी। इस तरह, यह आयोजन बिहार की राजनीति में एक नए बदलाव का संकेत बन रहा है, जो परिवार की एकता और राजनीतिक स्थिरता की ओर इशारा करता है।











