दरभंगा राजवंश की महारानी का अंतिम संस्कार
दरभंगा के ऐतिहासिक राजपरिवार की प्रमुख सदस्य महारानी कामसुंदरी देवी का निधन आज तड़के लगभग तीन बजे हो गया। उनके निधन की खबर जैसे ही फैली, हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए दरभंगा राज परिसर पहुंचने लगे। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। दोपहर के समय करीब ढाई बजे उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, जो मुख्य सड़क से गुजरते हुए दरभंगा राज परिसर के माधेश्वर प्रांगण में संपन्न हुआ।
महारानी का जीवन और सामाजिक योगदान
महारानी कामसुंदरी देवी का विवाह वर्ष 1940 में महाराज कामेश्वर सिंह के साथ हुआ था। इससे पहले उन्होंने महारानी राजलक्ष्मी देवी और महारानी कामेश्वरी प्रिया से भी विवाह किया था। उनके पति के निधन के बाद, उन्होंने समाज सेवा में अपना योगदान जारी रखा। उन्होंने कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना कर सामाजिक कार्यों को बढ़ावा दिया। दरभंगा राज परिवार ने देश के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें सबसे उल्लेखनीय था भारत-चीन युद्ध के दौरान 600 किलो सोने का दान। यह सोना भारत सरकार को राष्ट्र सेवा के उद्देश्य से दिया गया था।
राजकीय सम्मान और विवाद की स्थिति
महारानी के अंतिम संस्कार के दौरान राज्य सरकार और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी कौशल कुमार और बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा के पहले उनके आवास पर माहौल तनावपूर्ण हो गया था, जहां पारिवारिक विवाद के कारण झड़पें हुईं। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर दोनों पक्षों को अलग कर दिया। माना जा रहा है कि संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर चल रहे विवाद ने इस तनाव को जन्म दिया।










