इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का खुलासा
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पुराने वीडियो ने इस पूरे प्रकरण की सच्चाई को उजागर कर दिया है। यह वीडियो लगभग सात से आठ महीने पुराना बताया जा रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने सार्वजनिक मंच से एक बीजेपी पार्षद की प्रशंसा की थी।
वायरल वीडियो में पार्षद की प्रशंसा और विकास के दावे
वीडियो में मेयर पुष्यमित्र भार्गव पार्षद कमल वाघेला की जमकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं। वह उन्हें बेस्ट पार्षद का अवॉर्ड और अच्छा काम करने का सर्टिफिकेट भी सौंप रहे हैं। मेयर ने कहा कि कमल वाघेला ने अपने वार्ड में 24 सड़कें बनवाई हैं, जिनकी लागत लगभग 2 करोड़ 40 लाख रुपये है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पार्षद ने तीन साल में करीब 10 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए हैं। मंच से मेयर ने कहा कि वह इन कार्यों का सम्मान करते हैं और जनता को दिखाना चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में कितना काम हुआ है।
वास्तविक स्थिति और सवालों की जड़
हैरानी की बात यह है कि, इसी क्षेत्र में अब दूषित पानी से हुई मौतों का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवेज और पानी की लाइनों में लीकेज की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन प्रशासन ने इन पर ध्यान नहीं दिया। वायरल वीडियो के सामने आने के बाद मेयर के बयान पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अधिकारी उनकी बात नहीं मानते, लेकिन जब विकास का सर्टिफिकेट मंच पर दिया जा रहा था, तब असलियत क्या थी? सवाल यह है कि जब कागजों में 2.40 करोड़ रुपये की ड्रेनेज लाइन और पानी की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी थी, तो फिर लोग दूषित पानी क्यों पी रहे थे? यदि काम पूरा हो चुका था, तो फिर सीवेज और पानी की सप्लाई में समस्या क्यों आई और मौतें क्यों हुईं? इस वायरल वीडियो ने विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को स्पष्ट कर दिया है।











