मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों ने राजनीति में हड़कंप मचा दिया
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले पानी के कारण हुई मौतों ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गहरे झटके दिए हैं। इस घटना ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सीधे तौर पर अपनी ही सरकार और प्रशासन को ‘महापाप’ का भागीदार बताया है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को चेतावनी देते हुए कहा कि यह उनके लिए एक परीक्षा का समय है।
राजनीतिक विवाद और अधिकारी नाफरमानी पर तीखा हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राजनीतिक विवाद एक बंद कमरे की बैठक से शुरू हुआ। पुष्यमित्र भार्गव ने नगरीय विकास के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे से स्पष्ट कहा कि अधिकारी सुनते नहीं हैं, और वह ऐसे सिस्टम में काम करने को तैयार नहीं हैं। वहीं, इंदौर के एक अन्य वरिष्ठ विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी अधिकारियों की नाफरमानी पर गंभीर सवाल उठाए। उमा भारती ने इसी संदर्भ में तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि यदि अधिकारी सुन नहीं रहे थे, तो पद पर रहते हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? जनता के हित के लिए पद क्यों नहीं छोड़ा?
सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग
उमा भारती ने कहा कि 2025 का अंत इंदौर के लिए शर्मनाक रहा है, क्योंकि देश के सबसे स्वच्छ शहर में जहरीला पानी मिलना पूरी व्यवस्था को कलंकित कर गया है। उन्होंने सरकार की ओर से घोषित 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद को भी खारिज किया और कहा कि जिंदगी की कीमत 2 लाख नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ‘महापाप’ का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं हो सकता। दोषियों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए या फिर सरकार को घोर प्रायश्चित करना चाहिए।
उमा भारती ने सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा कि यह घटना उनकी कार्यशैली और न्याय की कसौटी है। उन्होंने मांग की कि पीड़ितों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए और जिम्मेदार अधिकारियों या नेताओं को कठोर सजा दी जाए। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, बल्कि यह सरकार की जिम्मेदारी भी है कि वह इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करे।











