इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला: आंकड़ों में असमंजस
इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर गुरुवार को भी अलग-अलग रिपोर्टें सामने आ रही हैं। एक दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों की संख्या चार बताई थी, जबकि मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे सात बताया। वहीं, स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस हादसे में अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है।
भागीरथपुरा इलाके में डायरिया और उल्टी के मामले: मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है
शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में एक हफ्ते पहले डायरिया और उल्टी के मामले सामने आए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बीमारी से अब तक छह महीने के बच्चे सहित 13 लोग जान गंवा चुके हैं, जबकि अधिकारियों ने केवल चार मौतों की पुष्टि की है। बुधवार को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री यादव ने मृतकों की संख्या चार बताई थी। कुछ ही घंटों बाद मेयर भार्गव ने सात मौतों की पुष्टि की, जिससे आंकड़ों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासनिक जांच और प्रभावित लोगों का स्वास्थ्य
इंदौर के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नाले का लीकेज होने के कारण दूषित पानी पाइपलाइन में मिल गया, जिससे भागीरथपुरा में बीमारी फैल गई। यह क्षेत्र इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां लगभग 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से करीब 200 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जो खतरे से बाहर हैं और बेहतर हो रहे हैं।
विजयवर्गीय ने कहा कि अधिकारियों ने मुझे बताया है कि इस बीमारी से चार लोगों की मौत हुई है, लेकिन क्षेत्र में आठ से नौ मौतों की भी जानकारी है। यदि यह सही साबित होती है, तो मृतकों के परिवारों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस बीच, अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पाइपलाइन की लीकेज ठीक करने के बाद पानी की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी गई है और घरों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।









