2026 में प्रदोष व्रत का महत्व और शुभ समय
साल 2026 की शुरुआत में ही प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो 1 जनवरी को गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पूरे वर्ष घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब साल के पहले दिन गुरु प्रदोष जैसे दुर्लभ संयोग बनते हैं, तो भगवान शिव और विष्णु की पूजा से जीवन में खुशहाली और स्वास्थ्य में सुधार होता है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत का शुभ समय और पारण विधि
प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय 1 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 35 मिनट से लेकर 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस समय के दौरान शिव पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और बेलपत्र अर्पण करने से श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं। व्रत का पारण रात के 8 बजकर 19 मिनट के बाद ही किया जाना चाहिए। सूर्यास्त के बाद पूजा कर फलाहार जैसे फल, दूध और मिठाई से व्रत का पारण करें। इससे व्रत की पूर्णता और शुभ फल सुनिश्चित होते हैं।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि और नियम
प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें कि मैं पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और शांति के लिए यह व्रत कर रहा हूँ। दिनभर सात्विक आहार लें, जैसे फलाहार, और क्रोध, झूठ या नकारात्मक विचारों से दूर रहें। संध्या समय पूजा के दौरान स्थान को साफ करें, शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक का फूल, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और दीपक जलाएं। धूप अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा के अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।











