मध्य प्रदेश की प्रमुख लाल टिपारा गौशाला में गोवंश की मौत का मामला
मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित लाल टिपारा गौशाला से एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जिसने सभी को चौंका दिया है। यहाँ एक ही समय में दर्जनों गोवंशों की मौत ने प्रशासनिक और प्रबंधकीय ढांचे की पोल खोल दी है। इस घटना ने राज्य में पशु संरक्षण और गौशाला प्रबंधन की गंभीरता को उजागर किया है।
गौशाला में मृत गोवंशों की संख्या और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
ग्वालियर नगर निगम और कृष्णायन NGO द्वारा संचालित इस गौशाला में वर्तमान में दस हजार से अधिक गोवंश मौजूद हैं। हाल ही में यहाँ भारी संख्या में गायों के शव एक-दूसरे के ऊपर पड़े पाए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। शासकीय पशु चिकित्सक आशुतोष आर्य ने पुष्टि की है कि इस घटना में एक दर्जन से अधिक गोवंशों की मौत हुई है। उन्होंने इलाज और निगरानी व्यवस्था में खामियों की ओर भी संकेत किया है।
मामले की जांच और गौशाला प्रबंधन का बयान
मामले की गंभीरता और सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के बाद नगर निगम के कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बीमार गोवंशों की पहचान और उपचार में देरी क्यों हुई, क्या मौत का कारण संक्रमण या चारे की गुणवत्ता से जुड़ा है, और मृत गायों के शवों के प्रबंधन में लापरवाही किसने की। गौशाला के मुख्य संरक्षक ऋषभ देव जी महाराज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्थिति सामान्य है। उन्होंने बताया कि यहाँ 8-9 हजार गौ माता रहती हैं और यह एक अस्पताल की तरह है, जहाँ घायल और बीमार आवारा गोवंश लाए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें सामान्य हैं और मृत गायों को लैंडफिल साइट पर भेजा जाता है।











