बिहार में पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए नई आवासीय विद्यालय योजना
पुलिसकर्मियों की कठिन ड्यूटी, लगातार स्थानांतरण और जीवन में मौजूद खतरों के बीच उनकी सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई और परिवार की मूलभूत सुविधाओं की होती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
राज्य के सभी 40 पुलिस लाइनों में जल्द ही आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे, ताकि पुलिसकर्मियों के बच्चों को निरंतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इस घोषणा के साथ ही पुलिस लाइनें अब केवल तैनाती स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा और जीवन यापन की सुविधाओं का केंद्र भी बन जाएंगी। यह निर्णय उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में लिया।
पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय स्कूल और जीवन यापन की सुविधाएं
सम्राट चौधरी ने कहा कि ट्रांसफर के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए पुलिस लाइन में ही आवासीय विद्यालय की व्यवस्था की जा रही है। इससे पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी निश्चिंत होकर निभा सकेंगे। गृह मंत्री ने यह भी बताया कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी सामान्य से अधिक समय तक चलती है और प्रदेश की सुरक्षा का बड़ा भार उनके कंधों पर है। इसलिए सरकार आवास, भोजन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी घोषणा की कि 30 जनवरी से पहले पटना पुलिस लाइन की तर्ज पर राज्य की सभी 39 अन्य पुलिस लाइनों में ‘जीविका दीदी की रसोई’ शुरू कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को स्वच्छ, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और कैशलेस इलाज का विचार
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी सरकार गंभीर है। गृह मंत्री ने बताया कि मेडिकल इलाज के लिए मिलने वाली बीमा राशि को पूरी तरह से कैशलेस करने पर विचार किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, जिन 36 पुलिसकर्मियों के परिजनों को बीमा राशि दी गई, उनमें से 24 की मौत बीमारी के कारण हुई थी। इसलिए त्वरित और बेहतर इलाज की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ मिलकर चल रही विशेष बीमा योजना के तहत अब तक 90 पुलिसकर्मियों को 43 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। अभी 30 मामले प्रक्रियाधीन हैं, जिन्हें जल्द निपटाने का लक्ष्य है। इस योजना में आत्महत्या के मामलों में भी 20 लाख रुपये तक की बीमा राशि का प्रावधान है।











