आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह का जातिगत पहचान पर बयान
हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह जातिगत पहचान और जातिवाद को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के रूप में बता रही हैं। इस वीडियो में उन्होंने कहा कि आज के युग में जाति को समझना और उसी आधार पर एक-दूसरे का सहयोग करना अनिवार्य हो गया है। सवर्ण समाज के लोग सरनेम (उपनाम) देखकर पक्षपात करते हैं, और हमें भी ऐसी मानसिकता अपनानी चाहिए। अपने समाज के सदस्यों को पहचान कर उनकी सहायता करनी चाहिए।
अजाक्स सम्मेलन में जाति आधारित विचारधारा का समर्थन
यह वीडियो 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर पार्क में आयोजित अजाक्स (AJAX) सम्मेलन का हिस्सा है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस सम्मेलन में मीनाक्षी सिंह ने कहा कि अजाक्स संगठन को केवल एक समूह तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे समाज तक इसकी पहुंच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ही समाज को जोड़ने वाली पहली कड़ी है। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि वे किस जाति से हैं और उनकी जाति क्या है। वर्तमान समय में जातिगत पहचान और जातिवादी सोच सबसे जरूरी मुद्दे बन चुके हैं।
सवर्ण समाज की प्रतिक्रिया और विवादित बयान
मीनाक्षी सिंह के इस बयान पर सवर्ण समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह सब संतोष वर्मा जैसे अधिकारियों की समय पर कार्रवाई न करने का परिणाम है, जिसके कारण बड़े पदों पर बैठे अधिकारी जातिवादी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा।
यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी आईएएस संतोष कुमार वर्मा ने विवादित बयान दिया था, जिसके कारण उन्हें पद से हटा दिया गया था। 23 नवंबर को अजाक्स सम्मेलन में ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर उनके बयान के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। सरकार ने उन्हें कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय में अटैच कर दिया था। वर्तमान में, जातिवादी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है, और अधिकारियों को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।











