दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम
दिल्ली सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत एक आदेश जारी किया है, जो GRAP स्टेज-IV (Severe+) के लागू होने तक प्रभावी रहेगा। इस आदेश के तहत प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राजधानी में 580 पुलिसकर्मियों की विशेष तैनाती की गई है। साथ ही, शहरभर में 126 चेक प्वाइंट्स स्थापित किए गए हैं, जहां 37 ‘प्रखर’ वैन तैनात रहेंगी। इन कदमों का उद्देश्य दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।
सख्त नियम और वाहन जांच के प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में संशोधन करते हुए दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुमति दी है, जो BS-IV मानकों से नीचे के हैं। दिल्ली सरकार ने अदालत से अनुरोध किया था कि BS-III और उससे पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, क्योंकि ये प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, सभी पेट्रोल, डीजल और CNG पंपों को निर्देशित किया गया है कि वे केवल वैध PUC (प्री-यूनिट चेक) सर्टिफिकेट दिखाने वाले वाहनों को ही ईंधन प्रदान करें। यदि कोई वाहन बिना PUC के ईंधन भरवाता पाया गया, तो उस पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा। PUC की जांच में फिजिकल सर्टिफिकेट, ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे, VAHAN डाटाबेस, वॉयस अलर्ट सिस्टम और पुलिस की मदद ली जाएगी।
बाहर की गाड़ियों पर रोक और निर्माण सामग्री पर प्रतिबंध
GRAP स्टेज-IV के दौरान दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड और BS-VI से कम मानक वाले वाहनों को राजधानी में चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहन, सार्वजनिक परिवहन, आपात सेवाएं और आवश्यक वस्तुओं से जुड़े वाहन इस नियम से छूट पाएंगे।
प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली निर्माण गतिविधियों को रोकने के लिए, रेत, गिट्टी, पत्थर, ईंट, सीमेंट, रेडी-मिक्स कंक्रीट और मलबा जैसी निर्माण सामग्री लेकर आने वाले वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त किया जा सकता है और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए क्यों जरूरी हैं ये कदम?
दिल्ली सरकार ने बताया कि IIT कानपुर (Indian Institute of Technology Kanpur) की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में दिल्ली के PM10 प्रदूषण में लगभग 19.7 प्रतिशत और PM2.5 में 25.1 प्रतिशत योगदान वाहनों का है। इसके अलावा, निर्माण गतिविधियां भी प्रदूषण का बड़ा कारण हैं। इन कारणों से सरकार ने वाहनों और निर्माण सामग्री पर सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है।
प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो, जिसके लिए 580 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। शहरभर में 126 चेक प्वाइंट्स बनाए गए हैं, जहां 37 ‘प्रखर’ वैन तैनात रहेंगी। साथ ही, ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी पेट्रोल पंपों पर मौजूद रहेंगे ताकि PUC नियमों का सख्ती से पालन हो सके।
इसके अतिरिक्त, ट्रैफिक जाम को नियंत्रित करने के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है। दिल्ली के 100 ट्रैफिक जाम हॉटस्पॉट्स की पहचान की गई है, जहां गूगल मैप की मदद से जाम को कम करने और ट्रैफिक प्रवाह सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
ये सभी निर्देश GRAP स्टेज-IV के लागू होने के साथ ही स्वतः प्रभावी हो जाएंगे और जब तक यह स्टेज हटा या संशोधित नहीं किया जाता, तब तक लागू रहेंगे। यदि भविष्य में फिर से GRAP स्टेज-IV लागू होता है, तो नए आदेश जारी किए बिना ही नियम अपने आप लागू हो जाएंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 सहित अन्य कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इन कदमों का उद्देश्य दिल्ली की हवा को साफ करना और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।










