पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का संकट
पाकिस्तान की स्थिति अब गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां उसकी बर्बादी का अंतिम दौर शुरू हो चुका है। इस देश की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब उसकी बुनियादी संरचनाएं भी खतरे में हैं। भारत या अफगानिस्तान की ओर से कोई भी खतरा नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान ही अपने पतन का जिम्मेदार बन रहा है। चीन से मिले आर्थिक सहायता और खदानों का दोहन कर पाकिस्तान अपने संसाधनों का शोषण कर रहा है, लेकिन इन प्रयासों का लाभ देशवासियों को नहीं मिल रहा है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की असली तस्वीर
पाकिस्तान की सरकार और सेना चीन (China) की कठपुतली बनकर अपने देश का नुकसान कर रहे हैं। बलोच और पश्तून समुदाय अपने संसाधनों पर अधिकार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है। चीन द्वारा बनाए गए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है, बल्कि ये परियोजनाएं पाकिस्तान के गृह युद्ध जैसी स्थिति को और भी जटिल बना रही हैं। खासतौर पर ग्वादर (Gwadar) के रेलवे नेटवर्क और खाड़ी व्यापार के लिए बनाए गए कॉरिडोर का निर्माण अभी भी अधूरा पड़ा है।
ग्वादर रेलवे परियोजना और सुरक्षा चुनौतियां
ग्वादर के रेलवे नेटवर्क का विस्तार और सुधार दिसंबर 2025 तक पूरी तरह से शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें कराची से पेशावर तक करीब 1700 किलोमीटर की डबल लाइन बनाने का लक्ष्य है। इस परियोजना का उद्देश्य रेलवे की गति बढ़ाना और सुरक्षा को मजबूत करना है। वहीं, ग्वादर पोर्ट को सऊदी अरब (Saudi Arabia) के साथ जोड़ने का प्रयास भी जारी है, ताकि गल्फ (Gulf) क्षेत्र में व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ सके।
लेकिन इन परियोजनाओं की सुरक्षा पाकिस्तान में एक बड़ा संकट है। बलोच और पश्तून समुदाय बार-बार पटरी उखाड़ने, बम धमाकों और हाईजैकिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। इन घटनाओं से लागत और सुरक्षा जोखिम दोनों ही बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान को विदेशी ऋण भी मिलते हैं, जो उसकी आर्थिक स्थिति को और भी कमजोर बना रहे हैं।











