स्मृति मंधाना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से व्यक्त की अपनी भावनाएँ
नई दिल्ली में आयोजित एक खास कार्यक्रम में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और क्रिकेट के प्रति अपने दृष्टिकोण को खुलकर साझा किया। शादी के टूटने के बाद यह पहली बार था जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। इस अवसर पर टीम इंडिया की कप्तान हरमनप्रीत कौर भी मौजूद थीं। स्मृति ने स्पष्ट किया कि उनके जीवन में क्रिकेट से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। उनका कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य गेंद को देखना और उसे मारना है, जो उनके जीवन का मूल मंत्र है।
मजबूत मानसिकता और मेहनत का महत्व
कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि वह अपने आप को मानसिक रूप से कैसे मजबूत बनाती हैं, तो स्मृति ने अपने जीवन दर्शन को साझा किया। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा से ही सरल स्वभाव की रही हूं। मैं किसी भी बात को लेकर अधिक विचार नहीं करती और अपने जीवन को जटिल नहीं बनाती। मेरा मानना है कि यदि आप पर्दे के पीछे कड़ी मेहनत करते हैं, तो सफलता निश्चित ही मिलती है।” उन्होंने आगे कहा, “मैदान पर जो कुछ भी होता है, वह सभी देखते हैं और उस पर निर्णय लेते हैं। लेकिन मैं अपने और अपनी टीम के प्रदर्शन को उस कार्य के आधार पर आंकती हूं जो हम पर्दे के पीछे करते हैं। मुझे उस मेहनत पर गर्व होता है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। यदि आप मेहनत करते हैं, तो आत्मविश्वास अपने आप बढ़ता है और आप जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है।”
प्रेरणा और टीम में विचारों का समावेश
स्मृति ने अपने प्यार और प्रेरणा के स्रोत के बारे में कहा, “मुझे क्रिकेट से अधिक कुछ भी प्रिय नहीं है। भारतीय जर्सी पहनना मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। बचपन से ही मेरा सपना था कि लोग मुझे ‘विश्व विजेता’ के रूप में पहचानें।” साथ ही, जब उनसे पूछा गया कि टीम में विचार-विमर्श और मतभेदों को कैसे संभाला जाता है, तो उन्होंने स्पष्ट किया, “मैं इसे कोई समस्या नहीं मानती। हर खिलाड़ी का उद्देश्य देश के लिए जीत हासिल करना है। हर किसी की अपनी सोच होती है कि हम कैसे मैच जीतेंगे। इस प्रक्रिया में बहस नहीं बल्कि स्वस्थ विचार-विमर्श होता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो इसका मतलब है कि हममें जीतने का जज्बा नहीं है।”











