उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी काफी दूर हैं, जिसमें लगभग एक साल का समय बाकी है। इससे पहले पश्चिम बंगाल सहित देश के पांच राज्यों में चुनाव होने हैं। बिहार के बाद बीजेपी का सबसे अधिक ध्यान पश्चिम बंगाल पर है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने यूपी में पहले ही सक्रियता बढ़ा दी है।
संघ की सक्रियता के पीछे मुख्य कारण
संघ की यूपी में सक्रियता का मुख्य कारण भी स्पष्ट है। एक ओर बिहार चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को मिली जबरदस्त सफलता है, तो दूसरी ओर 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। भले ही बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में अपनी जिम्मेदारी निभाई हो, लेकिन संघ को भी यह अच्छा नहीं लगा। संघ ने अपने अनुभव से सीखा है कि लंबे समय तक मेहनत करने के बाद ही बीजेपी को केंद्र और राज्यों में सत्ता मिल पाई है।
राजनीतिक और संगठनात्मक प्रयास
संघ ने बिहार में अपनी रणनीतियों से सफलता हासिल की है, और अब यूपी में भी उसी मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संघ ने जमीन पर मजबूत कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संघ के प्रस्तावित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का उद्देश्य भी इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का विपक्षी समाजवादी पार्टी से कम सीटें जीतना संघ के लिए चिंता का विषय रहा है। इसलिए अब संघ ने राम मंदिर जैसे मुद्दों को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्लान बनाया है।










