दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?
दिल्ली की जहरीली हवा का असली जिम्मेदार ट्रैफिक और स्थानीय प्रदूषक हैं, न कि पराली का धुआं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस बार दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली का योगदान केवल 5 प्रतिशत से भी कम रहा। इसके बावजूद, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में अधिकांश दिनों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार ‘बेहद खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा।
प्रदूषण के मुख्य स्रोत और समयानुसार बदलाव
वायु प्रदूषण के मुख्य हॉटस्पॉट में विवेक विहार, अलीपुर, नेहरू नगर, सिरी फोर्ट, द्वारका सेक्टर-8 और पटपड़गंज शामिल हैं। अध्ययन में पाया गया है कि सुबह 7 से 10 बजे और शाम 6 से 9 बजे के बीच ट्रैफिक पीक ऑवर में हवा में PM2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) की मात्रा तेजी से बढ़ती है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की रिसर्चर अनुमिता रॉयचौधरी का कहना है कि सर्दियों में हवा नीचे बैठी रहती है, जिससे वाहनों का धुआं वायुमंडल में फंस जाता है, जो एक जहरीले कॉकटेल का रूप ले लेता है।
वायु प्रदूषण में कमी के प्रयास और वर्तमान स्थिति
इस बार दिल्ली में पराली के धुएं का योगदान अधिकतम 22 प्रतिशत तक पहुंचा था, जो कि सामान्य दिनों में 5 प्रतिशत से भी कम रहा। इसके बावजूद, पूरे नवंबर महीने में AQI ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ के बीच रहा। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2018-2020 के बाद प्रदूषण में कोई खास गिरावट नहीं आई है। 2024 में दिल्ली का औसत PM2.5 स्तर फिर से बढ़कर 104.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया है।










