चंडीगढ़ में 15 वर्षों से छुपा रहस्य उजागर
चंडीगढ़ पुलिस ने एक जटिल और लंबी अवधि से छुपे हुए अपराध का पर्दाफाश किया है, जिसने शहर को दो दशक से अधिक समय तक दहशत में बनाए रखा था। इस मामले में मुख्य आरोपी, 38 वर्षीय टैक्सी चालक मोनू कुमार, जो सेक्टर 38 वेस्ट की शाहपुर कॉलोनी का निवासी है, नशे की लत के कारण महिलाओं को निशाना बनाता था। यह अपराध कहानी इतनी पुरानी है कि पुलिस भी हर बार उसके हाथ खाली ही रहती थी, क्योंकि आरोपी इतनी सावधानी से वार करता था कि कोई डिजिटल निशान नहीं छोड़ता था।
पुराने केस का खुलासा और डीएनए का रहस्य
2010 में हुई एक दर्दनाक हत्या ने इस कहानी को जन्म दिया, जब 21 वर्षीय एमबीए छात्रा नेहा अहलावत का शव करन टैक्सी स्टैंड के पास खून से सना और गला घोंटकर हत्या की गई अवस्था में मिला था। उस समय शव पर चोटों के निशान और बलात्कार के संकेत पाए गए थे, लेकिन पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया। इस केस को 2020 में अनसुलझा मानकर बंद कर दिया गया था। हालांकि, 15 साल बाद डीएनए जांच ने इस जटिल मामले का रहस्य खोल दिया।
डीएनए के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी
2022 में पुलिस को एक और महिला की हत्या का पता चला, जिसमें डीएनए प्रोफाइलिंग से पता चला कि हत्यारा वही था, जिसने नेहा और दूसरी महिला की हत्या की थी। इसके बाद, नवंबर और दिसंबर 2023 में, पुलिस ने रक्तदान शिविर का आयोजन कर हजारों डीएनए नमूने एकत्र किए। इसी दौरान आरोपी ने अपनी तीसरी वारदात को अंजाम दिया, जिसमें उसकी शिकार मोहाली की शनीचरा देवी बनी। आरोपी ने उसी तरह हमला किया, जैसे पहले करता था, और उसकी वीर्य के अंश महिला की साड़ी में मिले। इस डीएनए मेल ने पुलिस को आरोपी तक पहुंचाया। जब पुलिस ने आरोपी का पता लगाया, तो वह अमृतसर भाग चुका था। 6 मई 2024 को जब वह वापस आया, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने अपने अपराधों को स्वीकार कर लिया, और उसकी मोबाइल लोकेशन से भी पुष्टि हो गई कि वह उस इलाके में मौजूद था जहां शव मिला था।











